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Keshav Ram Singhal

Friday, November 11, 2022

जोखिम प्रबंधन पर जागरूकता लेख-श्रृंखला - 03 - जोखिम प्रबंधन के सिद्धांत

जोखिम प्रबंधन पर जागरूकता लेख-श्रृंखला - 03

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जोखिम प्रबंधन के सिद्धांत

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जोखिम प्रबंधन का उद्देश्य मूल्य का निर्माण और संरक्षण है। जोखिम प्रबंधन संस्था के प्रदर्शन में सुधार करता है, नवाचार को प्रोत्साहित करता है और उद्देश्यों को पाने का समर्थन करता है।

 

जोखिम प्रबंधन के आठ सिद्धांत आईएसओ 31000:2018 मानक के चित्र 2 में उल्लिखित हैं, जो प्रभावी और कुशल जोखिम प्रबंधन की विशेषताओं पर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, इसके मूल्य को संप्रेषित करते हैं और इसके इरादे और उद्देश्य की व्याख्या करते है। आईएसओ 31000:2018 मानक में दिया चित्र 2 नीचे पुनः प्रस्तुत (reproduce) किया जा रहा है।




 








साभार - ISO 31000:2018 मानक का चित्र 2 - "यह जानकारी आईएसओ 31000:2018 मानक से ली गई है और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था, आईएसओ (ISO), की अनुमति से पुन: प्रस्तुत किया गया है। कॉपीराइट आईएसओ के पास रहता है।"

Courtesy – Figure 2 of ISO 31000:2018 standard - “This information is taken from ISO 31000:2018 standard and it is reproduced with the permission of the International Organization for Standardization, ISO. Copyright remains with ISO.”


ये आठों सिद्धांत जोखिम प्रबंधन में मूल्य निर्माण और संरक्षण के लिए आधार स्तंभ हैं तथा संस्था को इन्हें अपनाना चाहिए। संस्था को जोखिम प्रबंधन ढाँचे और प्रक्रियाओं की स्थापना करते समय इन जोखिम प्रबंधन सिद्धांतों पर विचार कर लागू करने की कोशिश करनी चाहिए।

 







ये जोखिम प्रबंधन सिद्धांत संस्था को अपने उद्देश्यों पर अनिश्चितता के प्रभावों का प्रबंधन करने में सक्षम बनाने में सहायक होने चाहिए।

 

मूल्य निर्माण और सुरक्षा (Value creation and protection) के लिए जोखिम प्रबंधन के लिए ISO 31000:2018 मानक के चित्र 2 और खंड 4 (Clause 4) में आठ सिद्धांत बताए गए हैं। ये आठ सिद्धांत इस प्रकार हैं –

 

(1) एकीकरण (Integration)

जोखिम प्रबंधन संस्था की सभी गतिविधियों का एक अभिन्न भाग है अर्थात् संस्था की गतिविधियों में जोखिम प्रबंधन का एकीकरण (integration) जरूरी है। पर्याप्त जोखिम प्रबंधन के बिना संस्था के उद्देश्यों को प्राप्त करना कठिन है। जोखिम प्रबंधन को संस्था की सभी प्रक्रियाओं का एक अभिन्न भाग होना चाहिए।

 

(2) संरचित और व्यापक दृष्टिकोण

जोखिम प्रबंधन के लिए एक संरचित और व्यापक दृष्टिकोण सुसंगत और तुलनीय परिणामों में योगदान देता है। संस्था का शीर्ष प्रबंधन ही संस्था के लिए निर्णय-निर्धारण करने वाला होता है, इसलिए संस्था के शीर्ष प्रबंधन को जोखिम प्रबंधन के लिए एक संरचित और व्यापक दृष्टिकोण लागू करना चाहिए।

 

(3) अनुकूलित ढाँचे की जरुरत

जोखिम प्रबंधन ढांचा और प्रक्रिया संस्था के उद्देश्यों से संबंधित संस्था के बाहरी संदर्भ (external context) और आंतरिक संदर्भ (internal context) के लिए अनुकूलित और आनुपातिक होने चाहिए।

 

(4) समावेशी

हितधारकों की उचित और समय पर भागीदारी उनके ज्ञान, विचारों और धारणाओं पर विचार करने में सक्षम बनाती है। नवीनतम ज्ञान, विचारों और धारणाओं को समावेश करने से जागरूकता में सुधार होता है और जोखिम प्रबंधन की सुधरी हुई जानकारी मिलती है।

 

(5) गतिशील

जैसे ही संस्था के बाहरी सन्दर्भ और आंतरिक संदर्भ में परिवर्तन होता है, जोखिम उभर सकते हैं, बदल सकते हैं या गायब हो सकते हैं। जोखिम प्रबंधन उचित और समयबद्ध तरीके से उन परिवर्तनों और घटनाओं का अनुमान लगाता है, उनका पता लगाता है, स्वीकार करता है और प्रतिक्रिया करता है।

 

(6) सर्वोत्तम उपलब्ध जानकारी

जोखिम प्रबंधन के निवेश (inputs) ऐतिहासिक और वर्तमान जानकारी के साथ-साथ भविष्य की अपेक्षाओं पर आधारित होते हैं। जोखिम प्रबंधन स्पष्ट रूप से ऐसी जानकारी और अपेक्षाओं से जुड़ी किसी भी सीमा और अनिश्चितताओं को ध्यान में रखता है। प्रासंगिक हितधारकों के लिए स्पष्ट जानकारी (information) समय पर उपलब्ध रहनी चाहिए।

 

(7) मानव और सांस्कृतिक कारक

मानव व्यवहार और संस्कृति प्रत्येक स्तर और चरण (level and stage) पर जोखिम प्रबंधन के सभी पहलुओं को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं। जोखिम प्रबंधन को मानव कारकों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

 

(8) निरंतर सुधार

सीखने और अनुभव के माध्यम से जोखिम प्रबंधन में लगातार सुधार किया जाता है। जोखिम प्रबंधन को निरंतर प्रगति एवं संवृद्धि में सक्षम होना चाहिए।

 







इस प्रकार जोखिम प्रबंधन के उपर्युक्त सिद्धांत निम्न बातों की पहचान करते हैं -

 

- जोखिम प्रबंधन को मूल्य को स्थापित (establish value) करना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को संस्था प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग होना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन पर शीर्ष प्रबंधन (निर्णय-निर्धारण करने वालों) को ध्यान देना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को स्पष्ट रूप से भावी अनिश्चितताओं (भावी नुकसान, अनिष्ट, घाटे की संभावना, खतरा या संकट) की चर्चा करनी चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को सुव्यवस्थित एवं संरचित होना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को सर्वोत्तम उपलब्ध सूचना पर आधारित होना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को अनुकूल होना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को मानव कारकों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को पारदर्शी और समग्र होना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को गतिशील, पुनरावृत्तीय एवं परिवर्तन के प्रति संवेदी होना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को निरंतर प्रगति एवं संवृद्धि में सक्षम होना चाहिए।

 

जोखिम = उद्देश्यों पर अनिश्चितता का प्रभाव

जोखिम प्रबंधन = जोखिम को निर्देशित और नियंत्रित करने के लिए की जाने वाली समन्वित गतिविधियाँ


ध्यानार्थ - इस लेख को 15 दिसंबर 2022 को संशोधित किया गया है और आईएसओ 31000:2018 मानक के चित्र 2 को भी जोड़ा गया है। आईएसओ ईमेल दिनांक 21 नवंबर 2022 द्वारा प्राप्त मानक चित्र को पुन: प्रस्तुत करने के लिए आईएसओ की अनुमति के लिए धन्यवाद।

 

आपको यह जागरूकता लेख कैसा लगा, कृपया टिप्पणी करें। आपके सुझाव आमंत्रित हैं।

 

सादर,

 

केशव राम सिंघल

 

अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था ISO = International Organization for Standardization

 

साभार

आईएसओ 31000:2018 मानक का चित्र 2 - अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था, आईएसओ (ISO)

अन्य प्रतीकात्मक चित्र – इंटरनेट

जोखिम प्रबंधन पर जागरूकता लेख-श्रृंखला - 02 - जोखिम और जोखिम प्रबंधन क्या है?

जोखिम प्रबंधन पर जागरूकता लेख-श्रृंखला - 02
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जोखिम और जोखिम प्रबंधन क्या है?
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उद्देश्यों (परिणाम जो प्राप्त करने हैं) पर अनिश्चितता के प्रभाव को जोखिम कहा जाता है।

 

अनिश्चितता समझ या ज्ञान से संबंधित जानकारी की कमी (आंशिक भी) की अवस्था है। अनिश्चितता एक ऐसी स्थिति है जिसमें अधूरी या अपरिचित जानकारी जुड़ी होती है। यह भविष्य की बातों को भाँप लेने, किसी मापन में प्रयोग करने या किसी अज्ञात विषय में प्रयोग करने के लिए काम में लाई जाती है।

 

अनिश्चितता = निश्चितता की कमी, सीमित ज्ञान की स्थिति जहाँ मौजूदा स्थिति, भविष्य के परिणाम, या एक से अधिक संभावित परिणामों का सटीक वर्णन करना असंभव है।

 

कुछ मामलों में, अनिश्चितता संस्था संदर्भ के साथ-साथ इसके उद्देश्यों (परिणाम जो प्राप्त करने हैं) से संबंधित हो सकती है।

 

अनिश्चितता जोखिम का मूल स्रोत है, अर्थात् किसी भी प्रकार की "सूचना की कमी" जो उद्देश्यों (परिणाम जो प्राप्त करने हैं) के संबंध में मायने रखती है (और उद्देश्य, बदले में, सभी प्रासंगिक इच्छुक पार्टियों की जरूरतों और अपेक्षाओं से संबंधित होते हैं)।

 

हमें यह भी समझ लेना चाहिए कि -

 

(1) - एक प्रभाव (effect) अपेक्षित (expected) से विचलन (deviation) है। यह सकारात्मक, नकारात्मक या दोनों (सकारात्मक और नकारात्मक) हो सकता है, और अवसरों (opportunities) और खतरों (threats) को संबोधित कर सकता है, बना सकता है या परिणाम दे सकता है।

 

(2) - उद्देश्यों के विभिन्न पहलू और श्रेणियाँ हो सकती हैं, और विभिन्न स्तरों पर लागू की जा सकती हैं।

 

(3) - जोखिम आमतौर पर जोखिम स्रोतों (sources), संभावित घटनाओं (potential events), उनके परिणामों (consequences) और उनकी संभावना (likelihood) के संदर्भ में व्यक्त किया जाता है।

 

जोखिम प्रबंधन मानक से सम्बंधित विभिन्न पदों की परिभाषा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था ISO द्वारा प्रकाशित मानक ISO 31000:2018 और ISO 31073:2022 देखने की सलाह है।  










सरल शब्दों में समझे तो जोखिम का अर्थ है नुकसान, अनिष्ट, घाटे की संभावना, खतरा या संकट। जोखिम का तात्पर्य अपेक्षित परिणाम से विचलन के बारे में भविष्य की अनिश्चितता से है। एक व्यक्ति को सड़क पार करनी है और सड़क पर गाड़ियाँ आ जा रही हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा है। यही संभावित खतरा जोखिम है। जोखिम को निर्देशित और नियंत्रित करने के लिए समन्वित गतिविधियों को हम जोखिम प्रबंधन (risk management) कह सकते हैं। किस प्रकार व्यक्ति सफलतापूर्वक सड़क पार कर ले और कोई दुर्घटना न हो, यही सड़क पार करने का प्रबंधन जोखिम प्रबंधन है। संस्था में विभिन्न प्रकार के कार्य और प्रक्रियाएँ होती हैं और प्रत्येक कार्य और प्रक्रिया में संभावित खतरे होते हैं। संस्था में कार्यरत कार्मिकों को उन खतरों को नियंत्रित करना होता है, जिसके लिए वे बहुत से कदम उठाते हैं, यही समन्वित प्रयास जोखिम प्रबंधन कहलाता है।  

 

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि जोखिम के संबंध में एक संस्था को निर्देशित और नियंत्रित करने के लिए समन्वित गतिविधियों को जोखिम प्रबंधन कहा जा सकता है।














जोखिम = उद्देश्यों पर अनिश्चितता का प्रभाव 

जोखिम प्रबंधन = जोखिम को निर्देशित और नियंत्रित करने के लिए की जाने वाली समन्वित गतिविधियाँ 

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सादर,

केशव राम सिंघल

अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था ISO = International Organization for Standardization

चित्र प्रतीकात्मक साभार इंटरनेट

जोखिम प्रबंधन पर जागरूकता लेख-श्रृंखला - 01 - एक नई शुरुआत

जोखिम प्रबंधन पर जागरूकता लेख-श्रृंखला - 01

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एक नई शुरुआत

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जोखिम प्रबंधन (Risk management) पर जागरूकता बढ़ाने के लिए हिंदी में लेखों की श्रृंखला चालू की जा रही है। आशा है आपको पसंद आएगी।



 







हम आपको बता दें कि आईएसओ 31000:2018 जोखिम प्रबंधनदिशानिर्देश (Risk management – Guidelines) पर नवीनतम मानक है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय मानक संस्था ISO ने प्रकाशित किया है। पिछला संस्करण वर्ष 2009 में प्रकाशित हुआ था। ISO 31000:2018 मानक जोखिम प्रबंधन पर गठित तकनीकी समिति ISO/TC 262 द्वारा तैयार किया गया।

 

आईएसओ 31000 के दूसरे संस्करण (आईएसओ 31000:2018) ने इसके पहले संस्करण (आईएसओ 31000:2009) को रद्द कर बदल दिया है, जिसे हम कह सकते है कि तकनीकी रूप से संशोधित किया गया है।


आईएसओ 31000:2018 मानक में जोखिम प्रबंधन - दिशानिर्देशों पर सामान्य दृष्टिकोण दिया गया है, जो किसी उद्योग या क्षेत्र के लिए विशिष्ट नहीं है। मानक के दिशानिर्देश किसी भी प्रकार के जोखिम (जैसे, वित्तीय, तकनीकी, प्राकृतिक, प्रक्रियात्मक आदि) और किसी भी प्रकार की संस्था पर लागू किए जा सकते हैं।

 

हम आपको बता दें कि मानक के नए संस्करण में पिछले संस्करण की तुलना में मुख्य परिवर्तन इस प्रकार हैं: -

 

- मानक के इस संस्करण में जोखिम प्रबंधन के सिद्धांतों (Principles) का पुनरीक्षण (review) किया गया है, जो जोखिम प्रबंधन की सफलता के लिए प्रमुख मानदंड हैं।

 

- संस्था के प्रशासन से शुरू करने के लिए मानक के इस संस्करण में शीर्ष प्रबंधन के नेतृत्व को उजागर किया गया है और जोखिम प्रबंधन का एकीकरण (integration) किया गया है।

 

- यह देखते हुए कि नए अनुभव, ज्ञान और विश्लेषण से प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में प्रक्रिया तत्वों, क्रियाओं और नियंत्रणों में संशोधन हो सकता है, मानक के इस संस्करण में जोखिम प्रबंधन की पुनरावृत्ति प्रकृति पर अधिक जोर दिया गया है।

 

 - अनेक आवश्यकताओं और संदर्भों के अनुरूप एक खुली पद्धति नमूने (open management model) को बनाए रखने के लिए मानक के नए संस्करण में अधिक ध्यान देने के साथ सामग्री को सुव्यवस्थित किया गया है। 

 






अंग्रेजी में यह मानक 'आईएसओ 31000:2018, जोखिम प्रबंधन - दिशानिर्देश' (ISO 31000:2018, Risk management - Guidelines) अंतरराष्ट्रीय मानक संस्था ISO ने प्रकाशित किया है, जिसे आप ISO या अपने देश की राष्ट्रीय मानक संस्था, जो ISO का सदस्य है, से प्राप्त कर सकते है। भारत में यह मानक भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards) से प्राप्त किया जा सकता है।


आईएसओ 31000:2018 मानक संस्था में जोखिम प्रबंधन रणनीति विकसित करने में मदद करता है, ताकि जोखिमों को प्रभावी ढंग से पहचाना और कम किया जा सके, जिससे उनके उद्देश्यों को प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है और उनकी संपत्ति की सुरक्षा बढ़ जाती है। इसका व्यापक लक्ष्य संस्था में एक जोखिम प्रबंधन संस्कृति विकसित करना है, जहाँ कर्मचारियों और हितधारकों को जोखिम की निगरानी और प्रबंधन के महत्व के बारे में पता हो


आईएसओ 31000:2018 मानक में तीन स्तंभ दिखते हैं - (1) सिद्धांत, (2) ढाँचा, और (3) प्रक्रिया।


अंतरराष्ट्रीय मानक आईएसओ 31000 :2018 के चित्र संख्या 1 में दिखाया गया है कि जोखिम प्रबंधन आईएसओ 31000:2018 मानक में उल्लिखित सिद्धांतों, ढाँचे और प्रक्रिया पर आधारित है। जोखिम प्रबंधन सिद्धांतो के लिए मार्गदर्शन आईएसओ 31000:2018 मानक के खंड 4 में, जोखिम प्रबंधन ढाँचे के लिए मार्गदर्शन आईएसओ 31000:2018 मानक के खंड 5 में और जोखिम प्रबंधन प्रक्रिया के बारे में मार्गदर्शन आईएसओ 31000:2018 मानक के खंड 6 में दिया गया है। आईएसओ 31000:2018 मानक में दिया चित्र 1 नीचे पुनः प्रस्तुत (reproduce) किया जा रहा है।










साभार - ISO 31000:2018 मानक का चित्र 1 - "यह जानकारी आईएसओ 31000:2018 मानक से ली गई है और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था, आईएसओ (ISO), की अनुमति से पुन: प्रस्तुत किया गया है। कॉपीराइट आईएसओ के पास रहता है।"

 

Courtesy – Figure 1 of ISO 31000:2018 standard - “This information is taken from ISO 31000:2018 standard and it is reproduced with the permission of the International Organization for Standardization, ISO. Copyright remains with ISO.”


सिद्धांत - जोखिम प्रबंधन सिद्धांत संस्था में प्रभावी और कुशल जोखिम प्रबंधन के आवश्यक तत्व के रूप में सहायक होते हैं। 

ढाँचा - जोखिम प्रबंधन ढाँचा संस्था की गतिविधियों और कार्यों में जोखिम प्रबंधन को एकीकृत करने में सहायक होता है। 

प्रक्रिया - प्रक्रियाएँ संस्था के प्रबंधन, संरचना, संचालन और  गतिविधियों का अभिन्न अंग होती हैं। 


प्रसंगवश

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IS/ISO 31000:2018 मानक (पुनःपुष्टि वर्ष: 2019) को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा भारत में राष्ट्रीय मानक के रूप में अपनाया गया है। मेरी जानकारी के अनुसार, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने मानक का अंग्रेजी संस्करण प्रकाशित किया है और मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने इसका हिंदी संस्करण प्रकाशित किया है या नहीं। IS/ISO 31000:2018 अंग्रेजी संस्करण मानक की कीमत भारत के भीतर ₹340 और भारत के बाहर ₹3400 है। इसे भारतीय मानक ब्यूरो की वेबसाइट से खरीदा जा सकता है।

 

मैंने हिंदी में जोखिम प्रबंधन जागरूकता पर लेखों की श्रृंखला लिखना शुरू कर दिया है, जिसे मेरे ब्लॉग पर साझा किया जा रहा है। मुझे खुशी है कि अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था (आईएसओ) ने मुझे आईएसओ 31000:2018 मानक से चित्रों को पुन: पेश (reproduce) करने की अनुमति दी है। 

 

मैं जागरूकता लेख हिंदी में लिख रहा हूँ, हालाँकि मेरे ब्लॉग में गूगल अनुवाद (Google Translate) सुविधा है, इसलिए पाठक अपनी पसंद की भाषा में लेख पढ़ सकते हैं।


ध्यानार्थ - इस लेख को 5 दिसंबर 2022 को संशोधित किया गया है और आईएसओ 31000:2018 मानक के चित्र 1 को भी जोड़ा गया है। आईएसओ ईमेल दिनांक 21 नवंबर 2022 द्वारा प्राप्त मानक चित्र को पुन: प्रस्तुत करने के लिए आईएसओ की अनुमति के लिए धन्यवाद।

 

आपको यह जागरूकता लेख कैसा लगा, कृपया टिप्पणी करें। आपके सुझाव आमंत्रित हैं।

 

सादर,

केशव राम सिंघल

 

अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था ISO = International Organization for Standardization

 

साभार

आईएसओ 31000:2018 मानक का चित्र 1 - अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था, आईएसओ (ISO)

अन्य प्रतीकात्मक चित्र – इंटरनेट


Wednesday, February 3, 2016

डेल्फी विधि (Delphi Method) - जोखिम प्रबंधन के लिए एक उपकरण (A tool for Risk Management)


डेल्फी विधि (Delphi Method) - जोखिम प्रबंधन के लिए एक उपकरण (A tool for Risk Management)

आईएसओ 9001:2015 गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन जोखिम पर विचार करने के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण को गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली का एक अभिन्न अंग के रूप में स्थापित करने के लिए है, बजाय 'रोकथाम' (Prevention) को एक अलग अपेक्षा के रूप में।

जब मात्रात्मक डेटा (Quantitative data) उपलब्ध नहीं होता हैं या जब कोई संस्था भविष्य में एक प्रमुख संरचनात्मक बदलाव करने की कोशिश करती हैं, तो अक्सर निर्णय में संलग्न लोग पूर्वानुमान (forecasts) के लिए उन लोगों पर भरोसा करते हैं, जो उस क्षेत्र से होते हैं, उन स्थितियों से अच्छी तरह से वाकिफ और जानकार होते हैं। 'डेल्फी विधि' एक तरह से यह करने के लिए एक विधि है। डेल्फी विधि रेंड कार्पोरेशन (Rand Corporation) द्वारा शीत युद्ध के शुरू में विकसित की गई थी, यह युद्ध पर प्रौद्योगिकी के प्रभाव की भविष्यवाणी करने के लिए बनायी गई थी, जिसमें तकनीकी भविष्यवाणी का अपना आधार है।

पौराणिक कथाओं ने भविष्य की भविष्यवाणी की थी। मात्रात्मक मॉडल (Quantitative models) अक्सर सीमित उपयोग के होते हैं, जब भविष्य में बहुत आगे तक की भविष्यवाणी करने की कोशिश की जाती है। बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी बदलाव से प्रेरित 'पर्यावरण पैटर्न' समय की लंबी अवधि में नाटकीय रूप से बदल सकते हैं। जब भविष्य में हम आगे तक सोचते हैं, हम जानना चाहते हैं कि कैसे, संभावित अक्सर या तीव्र ये भविष्य के पूर्वानुमान हैं या होंगे। इस सबके लिए ही डेल्फी विधि उपयोगी है।

डेल्फी विधि एक संरचित, परस्पर संवादात्मक, गतिशील संप्रेषण विशेषज्ञ तकनीक है जो भविष्य पर अपनी राय साझा करने के लिए सभी को एक साथ शामिल करती है। पैनल के सदस्यों को एक प्रश्नावली दी जाती है, जिसमें भविष्य के बारे में "क्या","अगर," "क्या यदि"," या "जब" प्रश्न किए जाते हैं। उन्हें परिदृश्यों के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है और ऐसी स्थिति उत्पन्न या कब होने की संभावना की भविष्यवाणी करने के लिए कहा जा सकता है। पैनल के सदस्यों के बीच अनुभव, जानकारी की उपलब्धता, और व्याख्या के तरीकों में अंतर एक विस्तृत विचारों की विविधता सुनिश्चित करेगा। आम सहमति लाने के लिए पैनल सदस्यों की राय को संक्षेप रूप में अन्य पैनल के सदस्यों के साथ (गुमनाम रखते हुए) साझा किया हैं, और पैनल सदस्यों को इन दृष्टिकोण के आधार पर अपनी भविष्यवाणियों को समायोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। जब कुछ पैनल के सदस्यों के विचारों में समूह विचारो से अलग विचार होते हैं, तो उनसे अपने विचारों के लिए लिखित औचित्य प्रदान करने के लिए कहा जाता है, ताकि उनकी राय की ताकत निर्धारित की जां सके। कुछ पुनरावृत्तियों के बाद, समूह एक सर्वसम्मति पूर्वानुमान की ओर बढ़ता है।

इस तरह से डेल्फ़ी विधि का उपयोग जोखिम को संबोधित करने के लिए किया जा सकता हैं।

- केशव राम सिंघल