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Keshav Ram Singhal

Friday, November 11, 2022

जोखिम प्रबंधन पर जागरूकता लेख-श्रृंखला - 03 - जोखिम प्रबंधन के सिद्धांत

जोखिम प्रबंधन पर जागरूकता लेख-श्रृंखला - 03

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जोखिम प्रबंधन के सिद्धांत

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जोखिम प्रबंधन का उद्देश्य मूल्य का निर्माण और संरक्षण है। जोखिम प्रबंधन संस्था के प्रदर्शन में सुधार करता है, नवाचार को प्रोत्साहित करता है और उद्देश्यों को पाने का समर्थन करता है।

 

जोखिम प्रबंधन के आठ सिद्धांत आईएसओ 31000:2018 मानक के चित्र 2 में उल्लिखित हैं, जो प्रभावी और कुशल जोखिम प्रबंधन की विशेषताओं पर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, इसके मूल्य को संप्रेषित करते हैं और इसके इरादे और उद्देश्य की व्याख्या करते है। आईएसओ 31000:2018 मानक में दिया चित्र 2 नीचे पुनः प्रस्तुत (reproduce) किया जा रहा है।




 








साभार - ISO 31000:2018 मानक का चित्र 2 - "यह जानकारी आईएसओ 31000:2018 मानक से ली गई है और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था, आईएसओ (ISO), की अनुमति से पुन: प्रस्तुत किया गया है। कॉपीराइट आईएसओ के पास रहता है।"

Courtesy – Figure 2 of ISO 31000:2018 standard - “This information is taken from ISO 31000:2018 standard and it is reproduced with the permission of the International Organization for Standardization, ISO. Copyright remains with ISO.”


ये आठों सिद्धांत जोखिम प्रबंधन में मूल्य निर्माण और संरक्षण के लिए आधार स्तंभ हैं तथा संस्था को इन्हें अपनाना चाहिए। संस्था को जोखिम प्रबंधन ढाँचे और प्रक्रियाओं की स्थापना करते समय इन जोखिम प्रबंधन सिद्धांतों पर विचार कर लागू करने की कोशिश करनी चाहिए।

 







ये जोखिम प्रबंधन सिद्धांत संस्था को अपने उद्देश्यों पर अनिश्चितता के प्रभावों का प्रबंधन करने में सक्षम बनाने में सहायक होने चाहिए।

 

मूल्य निर्माण और सुरक्षा (Value creation and protection) के लिए जोखिम प्रबंधन के लिए ISO 31000:2018 मानक के चित्र 2 और खंड 4 (Clause 4) में आठ सिद्धांत बताए गए हैं। ये आठ सिद्धांत इस प्रकार हैं –

 

(1) एकीकरण (Integration)

जोखिम प्रबंधन संस्था की सभी गतिविधियों का एक अभिन्न भाग है अर्थात् संस्था की गतिविधियों में जोखिम प्रबंधन का एकीकरण (integration) जरूरी है। पर्याप्त जोखिम प्रबंधन के बिना संस्था के उद्देश्यों को प्राप्त करना कठिन है। जोखिम प्रबंधन को संस्था की सभी प्रक्रियाओं का एक अभिन्न भाग होना चाहिए।

 

(2) संरचित और व्यापक दृष्टिकोण

जोखिम प्रबंधन के लिए एक संरचित और व्यापक दृष्टिकोण सुसंगत और तुलनीय परिणामों में योगदान देता है। संस्था का शीर्ष प्रबंधन ही संस्था के लिए निर्णय-निर्धारण करने वाला होता है, इसलिए संस्था के शीर्ष प्रबंधन को जोखिम प्रबंधन के लिए एक संरचित और व्यापक दृष्टिकोण लागू करना चाहिए।

 

(3) अनुकूलित ढाँचे की जरुरत

जोखिम प्रबंधन ढांचा और प्रक्रिया संस्था के उद्देश्यों से संबंधित संस्था के बाहरी संदर्भ (external context) और आंतरिक संदर्भ (internal context) के लिए अनुकूलित और आनुपातिक होने चाहिए।

 

(4) समावेशी

हितधारकों की उचित और समय पर भागीदारी उनके ज्ञान, विचारों और धारणाओं पर विचार करने में सक्षम बनाती है। नवीनतम ज्ञान, विचारों और धारणाओं को समावेश करने से जागरूकता में सुधार होता है और जोखिम प्रबंधन की सुधरी हुई जानकारी मिलती है।

 

(5) गतिशील

जैसे ही संस्था के बाहरी सन्दर्भ और आंतरिक संदर्भ में परिवर्तन होता है, जोखिम उभर सकते हैं, बदल सकते हैं या गायब हो सकते हैं। जोखिम प्रबंधन उचित और समयबद्ध तरीके से उन परिवर्तनों और घटनाओं का अनुमान लगाता है, उनका पता लगाता है, स्वीकार करता है और प्रतिक्रिया करता है।

 

(6) सर्वोत्तम उपलब्ध जानकारी

जोखिम प्रबंधन के निवेश (inputs) ऐतिहासिक और वर्तमान जानकारी के साथ-साथ भविष्य की अपेक्षाओं पर आधारित होते हैं। जोखिम प्रबंधन स्पष्ट रूप से ऐसी जानकारी और अपेक्षाओं से जुड़ी किसी भी सीमा और अनिश्चितताओं को ध्यान में रखता है। प्रासंगिक हितधारकों के लिए स्पष्ट जानकारी (information) समय पर उपलब्ध रहनी चाहिए।

 

(7) मानव और सांस्कृतिक कारक

मानव व्यवहार और संस्कृति प्रत्येक स्तर और चरण (level and stage) पर जोखिम प्रबंधन के सभी पहलुओं को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं। जोखिम प्रबंधन को मानव कारकों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

 

(8) निरंतर सुधार

सीखने और अनुभव के माध्यम से जोखिम प्रबंधन में लगातार सुधार किया जाता है। जोखिम प्रबंधन को निरंतर प्रगति एवं संवृद्धि में सक्षम होना चाहिए।

 







इस प्रकार जोखिम प्रबंधन के उपर्युक्त सिद्धांत निम्न बातों की पहचान करते हैं -

 

- जोखिम प्रबंधन को मूल्य को स्थापित (establish value) करना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को संस्था प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग होना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन पर शीर्ष प्रबंधन (निर्णय-निर्धारण करने वालों) को ध्यान देना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को स्पष्ट रूप से भावी अनिश्चितताओं (भावी नुकसान, अनिष्ट, घाटे की संभावना, खतरा या संकट) की चर्चा करनी चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को सुव्यवस्थित एवं संरचित होना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को सर्वोत्तम उपलब्ध सूचना पर आधारित होना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को अनुकूल होना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को मानव कारकों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को पारदर्शी और समग्र होना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को गतिशील, पुनरावृत्तीय एवं परिवर्तन के प्रति संवेदी होना चाहिए।

- जोखिम प्रबंधन को निरंतर प्रगति एवं संवृद्धि में सक्षम होना चाहिए।

 

जोखिम = उद्देश्यों पर अनिश्चितता का प्रभाव

जोखिम प्रबंधन = जोखिम को निर्देशित और नियंत्रित करने के लिए की जाने वाली समन्वित गतिविधियाँ


ध्यानार्थ - इस लेख को 15 दिसंबर 2022 को संशोधित किया गया है और आईएसओ 31000:2018 मानक के चित्र 2 को भी जोड़ा गया है। आईएसओ ईमेल दिनांक 21 नवंबर 2022 द्वारा प्राप्त मानक चित्र को पुन: प्रस्तुत करने के लिए आईएसओ की अनुमति के लिए धन्यवाद।

 

आपको यह जागरूकता लेख कैसा लगा, कृपया टिप्पणी करें। आपके सुझाव आमंत्रित हैं।

 

सादर,

 

केशव राम सिंघल

 

अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था ISO = International Organization for Standardization

 

साभार

आईएसओ 31000:2018 मानक का चित्र 2 - अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था, आईएसओ (ISO)

अन्य प्रतीकात्मक चित्र – इंटरनेट

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